राजस्थान की प्रमुख घासें RPSC, RAS, पटवारी और REET परीक्षाओं के राजस्थान GK खंड में नियमित रूप से पूछी जाती हैं, और यह पृष्ठ इन परीक्षाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण घासों को शामिल करता है। पश्चिमी शुष्क भाग में सेवण घास जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर के खुले चारागाहों में प्रधान है, और थार के चारागाह क्षेत्र का लगभग 80 प्रतिशत भाग सेवण प्रकार का है। गंठिल वहां भी उग जाती है जहां अन्य घासें नहीं उगतीं और ऊंटों का मुख्य आहार है, जबकि मूरट ढीली रेत को बांधकर धोरों को स्थिर रखने में मदद करती है। राज्य में लगभग सर्वत्र पाई जाने वाली दूब रेंगने वाले तनों से फैलती है और मिट्टी को कटाव से बचाती है। कुछ घासें चारे से अधिक अपने अन्य उपयोगों के लिए जानी जाती हैं — खस की जड़ों से ठंडक देने वाली टट्टियाँ बनती हैं और मूंज के रेशे से रस्सी और टोकरियाँ। हर प्रश्न के साथ उत्तर और संक्षिप्त व्याख्या दी गई है, जिसमें वे वानस्पतिक नाम और जिले शामिल हैं जो परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाते हैं।
प्र. 1
राजस्थान के किन जिलों में सेवण घास के विस्तृत चरागाह पाए जाते हैं?
व्याख्या
सेवण पश्चिमी राजस्थान के अति शुष्क क्षेत्र की प्रमुख बहुवर्षीय चारा घास है। जैसलमेर, बाड़मेर व बीकानेर में इसके खुले चरागाह मिलते हैं। अत्यधिक सूखा सहने के कारण इसे मरुस्थल की घासों का राजा कहा जाता है।
राजस्थान में गर्मियों में प्रयुक्त होने वाली सुगंधित टट्टियाँ किस घास की जड़ों से बनाई जाती हैं?
व्याख्या
खस की जड़ों से सुगंधित तेल निकाला जाता है और इन्हीं जड़ों की टट्टियाँ बनती हैं, जिन पर पानी छिड़कने से हवा ठंडी और सुगंधित हो जाती है। जड़ों से चटाई, पंखे और टोकरियाँ भी बनाई जाती हैं।
राजस्थान में रस्सी, चटाई और टोकरी बनाने के लिए किस घास के रेशे का उपयोग किया जाता है?
व्याख्या
मूंज घास के ऊपरी पत्ती-आवरण से मजबूत रेशा मिलता है, जिससे रस्सी बटी जाती है। इसके निचले मोटे भाग से सूप, चटाई, टोकरी और मूढ़े बनाए जाते हैं। यह ग्रामीण दस्तकारी की प्रमुख घास है।
राजस्थान के थार मरुस्थल में रेत के टीलों पर पाई जाने वाली मूरट घास का वानस्पतिक नाम क्या है?
व्याख्या
मूरट थार मरुस्थल के रेतीले टीलों व बलुई मैदानों की घास है। यह गुच्छेदार घास 75 सेमी तक बढ़ती है। इसका तना पतला व सीधा होता है तथा इसकी उत्पत्ति अफ्रीका मानी जाती है।
राजस्थान में रेत के धोरों के स्थानान्तरण को रोकने में निम्न में से किस घास की मुख्य भूमिका मानी जाती है?
व्याख्या
मूरट की जड़ें रेत के कणों को बांधे रखती हैं जिससे धोरों का खिसकना रुकता है। यह घास रेत के टीलों, बलुई मैदानों तथा थार के कृषित क्षेत्रों में मुख्य रूप से फैली हुई है।
मूरट घास भारत में मुख्य रूप से किन दो राज्यों के थार मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाई जाती है?
व्याख्या
मूरट लगभग सम्पूर्ण भारत में मिलती है, परन्तु सघन रूप से यह थार के रेतीले भागों में पाई जाती है। यह उष्ण व उपोष्ण तथा शुष्क क्षेत्रों की घास है जो अफ्रीका से आई मानी जाती है।
राजस्थान में लगभग सर्वत्र पाई जाने वाली दूब घास (हरियाली) का वानस्पतिक नाम क्या है?
व्याख्या
दूब को बरमूडा घास व हरियाली भी कहा जाता है। यह फैलने वाली बहुवर्षीय घास है जिसकी पत्तियां छोटी व कोमल होती हैं तथा जिसे गाय, भैंस, भेड़, बकरी व घोड़े चाव से खाते हैं।
राजस्थान में सर्वत्र मिलने वाली दूब घास का प्रवर्धन मुख्य रूप से किसके द्वारा होता है?
व्याख्या
दूब में बीज बनते हैं, परन्तु इसके फैलाव में बीजों की भूमिका नहीं होती। यह जड़वृंत तथा भूमि पर रेंगने वाले स्टोलोन्स से फैलती है, और इसी कारण यह अच्छा मृदा बंधक भी मानी जाती है।
राजस्थान के लगभग सम्पूर्ण भाग में पाई जाने वाली तथा अच्छा मृदा बंधक मानी जाने वाली घास कौन-सी है?
व्याख्या
दूब राजस्थान के लगभग सभी भागों में मिलती है। यह फैलने वाली बहुवर्षीय घास है जिसका उत्पत्ति स्थल भारत माना जाता है और जो भारत में मुख्यतः चराई के काम में ली जाती है।
निम्न में से किस घास का उत्पत्ति स्थल भारत माना जाता है?
व्याख्या
दूब का उत्पत्ति स्थल भारत माना जाता है। यहां से यह बर्मा, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा दुनिया के लगभग सभी उष्ण कटिबन्धीय देशों में फैली। राजस्थान में यह वर्षभर उपलब्ध रहती है।
मकरा घास राजस्थान में किस प्रकार की भूमि पर आसानी से उग जाती है?
व्याख्या
मकरा पहाड़ी तथा बेकार पड़ी भूमि पर सहजता से उग आती है और इसका प्रबंधन बीज द्वारा होता है। राजस्थान के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में यह घास आसानी से देखी जा सकती है।
अकाल के समय राजस्थान में भेड़ व बकरी जैसे पशुओं का मुख्य आहार बनने वाली घास कौन-सी है?
व्याख्या
अकाल की स्थिति में मकरा भेड़-बकरियों का सहारा बनती है। यह एकवर्षीय घास है जिसे सुखाकर हे के रूप में खिलाया जाता है और इसमें कच्चा रेशा लगभग 40 से 42 प्रतिशत होता है।
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की प्रमुख घास गंठिल का वानस्पतिक नाम क्या है?
व्याख्या
गंठिल को इल्यूसिन कम्प्रेसा नाम से भी दर्ज किया गया है। यह छोटी, रेंगकर बढ़ने वाली बहुवर्षीय घास है जो मुख्यतः बलुई भूमि में पनपती है और ऊंटों की प्रिय चारा घास मानी जाती है।
गंठिल घास मुख्य रूप से राजस्थान के किस भाग में पाई जाती है?
व्याख्या
गंठिल बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं व जोधपुर में मिलती है। यह रेगिस्तानी क्षेत्रों की प्रमुख घास है और वहां भी उग आती है जहां दूसरी घासें नहीं पनपतीं।
राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में जहां अन्य घासें नहीं उगतीं वहां उगने वाली तथा ऊंटों को अत्यधिक प्रिय घास कौन-सी है?
व्याख्या
गंठिल रेगिस्तान की कठोर परिस्थितियों में भी टिक जाती है तथा ऊंट व भेड़ का मुख्य आहार बनती है। यह बलुई भूमि में रेंगकर फैलने वाली छोटी बहुवर्षीय घास है।
पश्चिमी राजस्थान में चारे की एक मुख्य घास निम्न में से कौन-सी है?
व्याख्या
लांप एकवर्षीय घास है जो कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों में मिलती है। यह भेड़ व बकरियों का मुख्य आहार है, ऊंट भी इसे बड़े चाव से खाते हैं, तथा इसमें कच्ची प्रोटीन 5 से 6 प्रतिशत होती है।
गंठिल छोटी व रेंगकर बढ़ने वाली बहुवर्षीय घास है जो बलुई भूमि पर वर्ष-दर-वर्ष बनी रहती है। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिलों में यह ऊंट व भेड़ का मुख्य चारा है।
पश्चिमी राजस्थान के अति शुष्क भागों में पाई जाने वाली सेवण घास का वानस्पतिक नाम क्या है?
व्याख्या
सेवण उत्तर-पश्चिमी गर्म शुष्क क्षेत्र की प्रकंदयुक्त बहुवर्षीय घास है। यह 2 मीटर तक ऊंची होती है और एक बार अच्छी तरह जम जाने पर 20 वर्षों तक बनी रह सकती है।
राजस्थान के किन जिलों में सेवण प्रधान खुले चारागाह मुख्य रूप से फैले हुए हैं?
व्याख्या
पश्चिमी राजस्थान में सेवण प्रधान खुले चारागाह लगभग 60 लाख हेक्टेयर में फैले हैं। ऊंची पोषकता के कारण मरुस्थल के पशु इस घास को विशेष रूप से पसन्द करते हैं।
राजस्थान में सेवण घास कितनी वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अच्छी तरह पनपती है?
व्याख्या
सेवण बलुई मैदानों, नीचे टीलों व टीलेनुमा उभारों पर उगती है तथा लम्बे सूखे को सहन कर लेती है। यह गर्म मौसम की घास है जिसमें कच्चा रेशा लगभग 31 प्रतिशत होता है।